गुस्से मे बच्चे से बात करनी कर दी है बंद, जानिए मासूम के दिल पर क्या पड़ता है इसका असर

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कहा जाता है कि कभी-कभी चुप रहना, किसी को सजा देने का सबसे अच्छा तरीका है। इसमें न तो किसी से शारीरिक और न ही मौखिक दुर्व्यवहार होता है। इसलिए इसे सजा देने का अहिंसक रूप माना जाता है। लेकिन हम यह समझ नहीं पाते कि मूक उपचार या किसी से बात न करना किसी व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। खासकर बच्चे, इसका सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। हो सकता है पैरेंट्स होने के नाते बच्चे की शैतानी या गलत हरकतों की वजह से कभी-कभी आप बच्चे से गुस्सा हो जाते हों।

उससे बात करना बंद कर देते हों, यह सोचकर कि शायद बच्चे को सजा देने का यही सही तरीका है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपका उससे बात न करना उसे कितना प्रभावित कर सकता है। हो सकता है कि वह वास्तव में किसी परेशानी में हो और आप भी उससे बात करना बंद कर दें , ऐसे में उसके पास बात करने के लिए कोई नहीं है। इन हालातों में वह बहुत असुरक्षित महसूस कर सकते हैं। इसके अलावा ऐसा लंबे समय तक चलने पर बच्चे के साथ आपके रिश्ते खराब हो सकते हैं। अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली इस पैरेंटिंग टैक्ट के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

​साइलेंट ट्रीटमेंट क्या है

मौन उपचार या साइलेंट ट्रीटमेंट तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से बात करना बंद कर देता है। लोग अक्सर इस जुमले का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को पाने या उन्हें अपनी गलती का अहसास कराने के लिए करते हैं। कुल मिलाकर यह एक तरह की सजा है। कभी-कभी जो लोग साइलेंट ट्रीटमेंट का यूज करते हैं, वे अपने आसपास उस व्यक्ति को देखना तक पसंद नहीं करते।

फोटो साभार : TOI

​पैरेंट्स इस टैक्ट का इस्तेमाल क्यों करते हैं

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माता-पिता द्वारा इस उपचार का इस्तेमाल करने के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों में यह उपचार बच्चों को सबक सिखाने के लिए होता है। कुछ कारण यहां बताए गए हैं –

  • जब उन्हें अपनी लिमिट को बनाए रखने और उनका सम्मान करने के लिए कहा जाता है।
  • जब बच्चे कुछ गलत करके माता-पिता का अनादर करते हैं।
  • बड़ों की बात को अनसुना कर देते हैं।

इसके अलावा इस टैक्ट का इस्तेमाल उन पैरेंट्स द्वारा किया जाता है, जो चाहते हैं कि सब कुछ उनके हिसाब से चले। इतना ही नहीं, जो माता- पिता बच्चों के असहज सवालों के जवाब देने से बचते हैं, वे साइलेंट टैक्ट का प्रयोग कर सकते हैं।

फोटो साभार : TOI

​साइलेंट ट्रीटमेंट बच्चे को कैसे प्रभावित करता है

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बच्चे को अनदेखा करना या उनसे बात न करना, उन्हें अकेला महसूस करा सकता है। वह असहज, असुरक्षित और तनावग्रस्त हो सकते हैं। शोध से पता चला है कि बार-बार अनदेखा महसूस होने से व्यक्ति का आत्मसम्मान और आत्मविश्वास कम हो सकता है। यह प्रभाव तब और बढ़ जाता है, जब ऐसा व्यवहार बच्चों के किसी करीब जैसे माता या पिता द्वारा किया जाए।

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​क्या इसे भावनात्मक शोषण कहा जा सकता है

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भले ही यह ट्रीटमेंट किसी को शारीरिक रूप से नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन किसी व्यक्ति की भावनाओं पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। किसी के रूठने और अनदेखा करने की भावना मन को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकती है। इससे असुरक्षा, चिंता और तनाव हो सकता है। मौन उपचार बच्चों को भी चोट पहुंचाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक मैन्यूपुलेशन टूल भी है, जो बच्चे को बदलने के लिए मजबूर करता है। भले ही वह इस बदलाव के लिए तैयार हों या फिर न हों।

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​मौन उपचार की बजाय क्या कर सकते हैं

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रिश्ते में किसी भी मुद्दे को हल करने के लिए बातचीत सबसे अच्छा तरीका है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों से बात न करना या उन्हें अनदेखा करना किसी समस्या का हल नहीं है। ऐसा करने से उन्हें अपनी गलती का अहसास होने की बजाय दुख ही होगा। बेहतर है बच्चों से हेल्दी कम्यूनिकेशन करें और समस्याओं को सुलझाएं।

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