आयुर्वेद डॉ. ने बताया गांजा, भांग और चरस का अंतर, इस तरह लेने से मिलेगा फायदा

0
22
आयुर्वेद डॉ. ने बताया गांजा, भांग और चरस का अंतर, इस तरह लेने से मिलेगा फायदा


कई वर्षों से कैनाबिस यानी भांग के पौधे पर बहस जारी है। कुछ लोग इसके इस्तेमाल को कानूनी बनाने की मांग करते हैं, तो कुछ इसे गैर-कानूनी ही रहने देना चाहते हैं। भांग के साथ गांजा और चरस का नाम भी आता है। कुछ लोग इन सभी चीजों को एक मानते हैं। लेकिन यह सच नहीं है।

भांग के पौधे की सच्चाई क्या है? बोहेको के आयुर्वेदिक मेडिकल प्रैक्टिशनर डॉ. हर्षद जैन ने कहा कि भांग के पौधे के बारे में जितना हम जानते हैं, वो अधिकतर भ्रामक है। गांजा, भांग और चरस के बीच एक अंतर होता है। साथ ही, एक स्थिति में इसका इस्तेमाल कानूनी और फायदेमंद होता है।

हेम्प, कैनाबिस और मारिजुआना है अलग

डॉ. हर्षद जैन के मुताबिक, हेम्प और मारिजुआना ऐसे पौधे हैं, जो कि एक ही प्रजाति- कैनाबिस से संबंधित हैं। दोनों में फर्क करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक है, टेट्राहाइड्रोकैनाबिनॉल (टीएचसी), नशा पैदा करने वाले कैनबिनोइड की उपस्थिति। ऐतिहासिक रूप से हेम्प को निम्न स्तर के टीएचसी (अक्सर, 0.3%) के लिये जाना जाता है, वहीं मारिजुआना को उच्च स्तर के टीएचसी के लिये जाना जाता है।

एक नहीं हैं गांजा, भांग, चरस

95765860

हेम्प पौधे में पत्तियां (भांग), बीज, बड्स (गांजा) और रेजिन (चरस) के साथ डंठल भी होता है। इन सभी के कई सारे औद्योगिक और चिकित्सकीय उपयोग हैं। नेशनल ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक्स (एनडीपीएस) एक्ट के अनुसार, भांग (पत्तियां), बीजों तथा फाइबर के साथ कानूनी रूप से पूरी अनुमति है। जबकि चरस (रेजिन) और गांजा (बड्स) गैरकानूनी हैं। इतना ही नहीं, भांग भारत की संस्कृति और दवाओं का एक अभिन्न अंग रहा है, वहीं कैनाबिस को अथर्व वेद में सबसे पवित्र और शक्तिशाली जड़ी-बूटी माना गया है। आयुर्वेदिक दवा के रूप में लेने पर इसे दर्द, अधूरी नींद, तनाव, खराब पाचन से छुटकारा पा सकते हैं।

सिर्फ आयुर्वेदिक दवा के रूप में इस्तेमाल

95765857

कैनाबिस पत्ती-आधारित दवाओं के मानव शरीर पर काम करने की वजहों में से एक एंडोकैनाबिनोइड सिस्टम (ईसीएस) की उपस्थिति है। यह कोशिका को सिग्नल देने वाली प्रणाली है, जिसमें एंडोकैनाबिनोइड्स, एंजाइम और रिसेप्टर्स शामिल हैं। ईसीएस की वजह से शरीर पर्याप्त रूप से कार्य करता है और संतुलन या समस्थिति बनी रहती है। चूंकि, यह पूरे शरीर में फैला होता है, कैनाबिस की पत्तियों पर आधारित दवाओं का बाहरी त्‍वचा पर या जीभ के नीचे प्रयोग समान रूप से प्रभावी है और रोगों के लक्षणों से राहत के लिये प्राकृतिक उपचार प्रदान करते हैं।

पूरे पौधे का इस्तेमाल होता है

95765855

भारत में कैनाबिस पत्ती-आधारित दवाएं अलग-अलग राज्यों के आयुष विभाग के अंतर्गत आती हैं। आयुर्वेदिक दवाएं उपचार के लिये पूरे पौधे के अर्क के सहक्रियाशील प्रभावों का लाभ उठाती है, जोकि संपूर्ण हीलिंग के लिये महत्वपूर्ण है। फुल-स्पेक्ट्रम कैनाबिनोइड का सहायक प्रभाव अकेले या फिर ब्रॉड-स्पेक्ट्रम अर्क से ज्यादा प्रभावी होता है।

ज्यादा इस्तेमाल है खतरनाक

95765854

जब कैनाबिस पत्ती आधारित दवाओं की बात आती है, विशेषरूप से उनमें फुल स्पेक्ट्रम अर्क शामिल होता है। लेकिन ज्यादा डोज हमेशा बेहतर या तीव्र परिणाम की गारंटी नहीं होता। इन दवाओं का सही रूप में सेवन नहीं करने से दुष्‍प्रभाव पड़ता है जैसे नींद आना, डायरिया, मुंह सूखना आदि। किसी भी कैनाबिस पत्ती-आधारित दवा को लाइसेंसधारी चिकित्सक की देखरेख में लेना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here