स्लीप एप्नीया का इलाज ना किया जाए तो बढ़ जाती है एजिंग – स्टडी

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स्लीप एप्नीया का इलाज ना किया जाए तो बढ़ जाती है एजिंग - स्टडी


Aging is accelerated by sleep apnea : यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिसर्चर्स ने पाया है कि यदि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्नीया (Obstructive sleep apnea) यानी ओएसए का इलाज नहीं किया जाए, तो पीड़ित व्यक्ति में बायोलॉजिकल एजिंग (biological ageing) यानी जैविक उम्र बढ़ जाती है. हालांकि, यदि उसका उचित इलाज हो तो इस प्रोसेस की स्पीड धीमी की जा सकती है. आपको बता दें कि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया एक क्लीनिकल डिसऑर्डर है, जिसमें आमतौर पर जोर से खर्राटों के साथ नींद के दौरान बार-बार सांस रुकने की परेशानी आती है. इस तरह सांस का रुकना शरीर में कुछ पलों के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई को बंद कर देता है और कार्बन डाई ऑक्साइड के बाहर निकलने को रोक देता है. परिणामस्वरूप, व्यक्ति थोड़े समय के लिए जागता है, उसके सांस लेने की प्रक्रिया दोबारा शुरू होती है. ये रात के दौरान कई बार हो सकता है, जिसके चलते अच्छी नींद लेना नामुमकिन हो जाता है.

वहीं, दिन के दौरान व्यक्ति को अधिक नींद आ सकती है. साथ ही इससे जूझ रहे व्यक्ति को ध्यान लगाने में भी मुश्किल होती है. इस स्टडी का निष्कर्ष यूरोपियन रेस्पिरेटरी जर्नल (European Respiratory Journal) में प्रकाशित किया गया है.

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कैसे किया गया टेस्ट
बायोलॉजिकल एजिंग की गति मापने के लिए ब्लड टेस्ट का सहारा लिया जाता है, जिसमें डीएनए का विश्लेषण और अल्गोरिदम का प्रयोग होता है. जब किसी व्यक्ति की समय गणना वाली उम्र की तुलना में बायोलॉजिकल एजिंग की गति ज्यादा तेज हो, तो उसे एपिजेनेटिक एज एक्सीलेरेशन कहते हैं. इससे क्रॉनिक रोग और मौत का खतरा बढ़ता है.

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रिसर्चर्स ने पाया कि ओएसए के कारण नींद में गड़बड़ी और नींद के दौरान ऑक्सीजन के लेवल में कमी से बायोलॉजिकल एज बढ़ने की गति कंट्रोल ग्रुप की तुलना में ज्यादा थी. जबकि ओएसए से पीड़ित जिन लोगों को सीपीएपी इलाज दिया गया, उनमें एपिजेनेटिक एज की गति धीमी थी. लेकिन कंट्रोल ग्रुप में एजिंग की गति में कोई बदलाव नहीं आया. मतलब ये कि ओएसए के इलाज से बायोलॉजिकल एजिंग की गति को आंशिक तौर पर उलटा जा सकता है.

Tags: Health, Health News, Lifestyle



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