जरूर लागू होगी समान नागरिक संहिता… टाइम्स नाउ समिट में बोले गृह मंत्री शाह- आर्टिकल 370 और UCC के मुद्दे में बड़ा फर्क

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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने को प्रतिबद्ध है। हालांकि, इस पर सभी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन और चर्चाओं के बाद ही कदम उठाया जाएगा। उन्होंने हमारे सहयोगी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ की एडिटर इन चीफ नाविका कुमार से बातचीत में कहा कि धारा 371 को हटा दिया तो समान नागरिक संहिता भी जरूर लागू होगी। हालांकि, इसका टाइमलाइन बताने के सवाल पर वो कन्नी काट गए। टाइम्स नाउ समिट में भाग लेने पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री से नाविका कुमार से बातचीत में आर्टिकल 370 हटाए जाने को लेकर केंद्र की उपलब्धियों और समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर विस्तार से बातचीत की। आइए टाइम्स नाउ के सवालों और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से दिए गए उनके जवाब जानते हैं…

सवाल: अमित शाह जी आपने कहा कि जब सत्ता में आए तो सबसे बड़ी उपलब्धि रही जम्मू और कश्मीर का भविष्य जिस तरह से आपने बदला। मैं निजी तौर से आपसे पूछती हूं कि आपके कार्यकाल में उपलब्धि क्या आप जम्मू कश्मीर को मानते हैं? और क्या इसकी वजह से दुनिया में भारत ने एक नया स्टेटमेंट दिया है?

जवाब: देखिए मेरी व्यक्तिगत कोई उपलब्धि नहीं होती है। मैं मोदीजी की कैबिनेट का एक सदस्य हूं। पूरी कैबिनेट की उपलब्धि होती है, पूरी सरकार की उपलब्धि होती है। मगर हां, जम्मू-कश्मीर में मोदी सरकार ने बहुत बड़ा परिवर्तन किया है। वर्षों से ये प्रचारित किया जाता था कि धारा 370 के कारण ही जम्मू-कश्मीर भारत के साथ जुड़ा है। अब धारा 370 नहीं है, 35ए नहीं है। जम्मू कश्मीर भारत के साथ जुड़ा है। और लगभग 30 हजार पंच-सरपंच लोकतंत्र को जम्मू-कश्मीर में प्रोपोगेट करके एक नई लोकतांत्रिक पीढ़ी वहां खड़ी हो रही है। 56 हजार करोड़ का इन्वेस्टमेंट आया है। 80 लाख टूरिस्ट जो आजादी के बाद सबसे ज्यादा हैं, वो अबतक चले गए हैं जम्मू-कश्मीर के अंदर। और इसके साथ-साथ जम्मू कश्मीर की अपनी भाषाओं को पहली बार हमने राज्य की भाषाओं का स्थान दिया है।

वहां जो पिछड़े हैं, दलित हैं, आदिवासी हैं, उन्हें आरक्षण का फायदा मिला है। महिलाओं को अपना अधिकार मिला है। जम्मू-कश्मीर में हर घर में बिजली पहुंचाने का काम समाप्त हो चुका है। हर घर में नल से जल पहुंचाने का काम समाप्त हो चुका है। जम्मू-कश्मीर में हर व्यक्ति को 5 लाख तक का इलाज आज मुफ्त में दिया जा रहा है। और इन्वेस्टमेंट की नई ऊंचाइयां जम्मू-कश्मीर हासिल कर रहा है। और जहां तक आतंकवाद का सवाल है, मैं इतना निश्चित रूप से कह सकता हूं कि 90 के दशक से जब से आतंकवाद शुरू हुआ, तब से लेकर आज तक आतंकवाद की सबसे कम घटनाएं और पथराव शून्य हो गए हैं। ये बहुत बड़ी उपलब्धि है मोदी सरकार की, इसमें कोई दो राय नहीं है। और बड़े-बड़े सुरक्षा के पंडित कहते थे कि धारा 370 को छूना मत, हाथ जल जाएंगे। धारा 370 आज चली गई, जम्मू-कश्मीर खुशहाल है। देश के अंदर भी आतंवाद में कमी लाने में इसमें बहुत बड़ी मदद मिली है।

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सवाल: अमित शाह जी, इस सवाल के साथ एक और सवाल जुड़ा होता है जिसे कई लोग कहते हैं कि फर्जी पिक्चर के जरिए उठाया गया था। कश्मीरी हिंदुओं का सवाल। आज भी वो अपने घर लौट नहीं पाए हैं। ये आपका शायद एक वादा है जिसके पूरा होने का अभी भी लोग इंतजार कर रहे हैं। इस वादे पर आप क्या कहेंगे?

जवाब: देखिए नाविका जी, ये एक रिलेटिव सवाल है। जम्मू-कश्मीर में हिंसा पहले मानो 400 नागरिक माने जाते थे। लक्ष्य तो कोई ना मारा जाए ऐसा होना चाहिए, है भी। परंतु आज 12 मर रहे हैं। 400 से 12 तक हम पहुंच गए हैं, तो 12 से शून्य भी हम कर देंगे। और जिस दिन ये होगा, सबके लिए अच्छा माहौल होगा। और जो इन्वेस्टमेंट वहां जा रहा है। बाहर से ढेर सारे लोग वहां जा रहे हैं। मगर स्वाभाविक रूप से आतंकवाद की और आतंकवाद के पनाहगारों की जड़ें इतनी नीचे तक गई हैं कि उसे जड़ से उखाड़ने में समय लगेगा। हम इस समय प्रोसेस में हैं। मैं विश्वास दिलाता हूं कि जम्मू-कश्मीर में अब आतंक की जड़ों को हम फैलने नहीं देंगे। हम संपूर्ण जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद मुक्त कराने के लिए कटिबद्ध हैं।

सवाल: अमित शाह जी, किसी भी राजनीतिक दल के लिए 5 साल का समय होता है जब समीक्षा होती है। वैसे तो चुनाव हर साल, हर वक्त चलते रहते हैं हमारे देश में। लेकिन लोकसभा चुनाव हर पांच साल में एक बार आते हैं। आपके घोषणापत्र का सबसे बड़ी और कठिन परीक्षा जो थी वो थी धारा 370 की जिसे आपने कहकर हटा दिया। लेकिन कुछ और वादे हैं जैसे यूनिफॉर्म सिविल कोड। चूंकि चार साल खत्म होने वाले हैं हाल के चुनाव के बाद। इसपर बीजेपी की तरफ से और सरकार की तरफ से क्या रवैया रहेगा। यूनिफॉर्म सिविल कोड पर अबतक मुझे लगता है कि एक लॉ कमीशन दूसरा लॉ कमीशन, एक सजेशन दूसरा सजेशन चल रहा है। फैसला कब होगा?

जवाब: देखिए यूनिफॉर्म सिविल कोड भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी की अब तक की राजनीतिक यात्रा का हमारा वादा रहा है, देश की जनता से। और ना केवल भारतीय जनता पार्टी, संविधान सभा ने भी देशभर के विधानमंडलों को और संसद को ये सलाह दी है कि जब भी उचित समय आए यूनिफॉर्म सिविल कोड इस देश में आना चाहिए। किसी भी पंथनिरपेक्ष राज्य के लिए धर्म के आधार पर कानून नहीं होने चाहिए। अगर राष्ट्र और राज्य पंथनिरपेक्ष हैं तो धर्म के आधार पर कानून कैसे हो सकते हैं? हर धर्म के मानने वाले के लिए एक कानून होना चाहिए जो देश का विधानमंडल और देश की संसद पारित करे। परंतु समय के साथ सबने संविधान सभा की इस बात को भुला दिया। भारतीय जनता पार्टी के अलावा आज कोई पार्टी यूनिफॉर्म सिविल कोड के पक्ष में नहीं है। हां, हिम्मत नहीं होगी तो विरोध नहीं करेंगे। मगर ये नहीं कहेंगे कि हां लागू करिए हम आपके साथ खड़े हैं।

हम लोकतंत्र के अंदर हैं। लोकतंत्र में स्ववस्थ बहस जरूरी है। जब इतने सारे राजनीतिक दल का एक अभिप्राय हो और दूसरे राजनीतिक दलों का कुछ और अभिप्राय हो, मंशा चाहे जो हो, वोट प्राप्त करने की हो या जो हो, पर अगर उनका अभिप्राय ये है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड अभी नहीं लाना चाहिए तो स्वस्थ और खुली बहस की जरूरत है। तो जहां-जहां बीजेपी का शासन है, वहां तीन राज्यों में अबतक हिमाचल उत्तराखंड और गुजरात में हमने एक पैनल बनाया है। और पैनल सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में बने हैं। सारे दल, समाज जीवन के सारे लोग, सभी धर्म संप्रदाय के सारे लोग, उनके समाने अपना-अपना पक्ष रख रहे हैं। उस पर जो एडवाइजरी दी जाएगी, उसके आधार पर हम काम करेंगे। स्वाभाविक रूप से इस प्रकार के शिखर सम्मेलन में भी इस पर एक स्वस्थ बहस छिड़ी हुई है। तो देश की जनता को मन बनाने में इससे बहुत बड़ी मदद मिलती है। मैं अभी भी कहना चाहता हूं देश की जनता को कि भारतीय जनता पार्टी यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने के लिए अडिग है और हम लाकर रहेंगे पर सारी लोकतांत्रिक चर्चाओं की समाप्ति के बाद।

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सवाल: धारा 370 हटाने में भी कोई आपके साथ नहीं था। लेकिन आप जब चल पड़े तो आपने कर दिखाया। यूसीसी पर कदम क्यों खींच रहे हैं? टाइमफ्रेम क्यों नहीं बता रहे?

जवाब: देखिए दोनों में अंतर है। धारा 370 जब लाई गई तभी हमारे संविधान निर्माताओं ने दूरदर्शिता के साथ इसे टेंपररी आर्टिकल कहा था। उसी वक्त आप संविधान की बहस भी पढ़ लीजिए। हालांकि अंतिम समय में जब इसे लाया गया, तब बहस नहीं हुई, जो भी कारण रहे होंगे। परंतु संविधान की आत्मा थी कि स्पेशल स्टेटस संविधान का हिस्सा नहीं रह सकता। एक समय चाहिए जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ अच्छी तरह से जुड़ने का। मुझे लगता है कि 70 साल बहुत बड़ा समय है, बहुत लंबा समय है। इसपर बाकी सारे राज्यों को कोई टिप्पणी देने की जरूरत भी नहीं थी क्योंकि स्पेशल स्टेटस एक ही राज्य में था। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने हमें ये दरख्वास्त भेजी थी जिसके आधार पर हमने ये निर्णय लिया था तो आर्टिकल 370 और यूसीसी को आप एक तराजू में नहीं तौल सकते। दोनों में मूलभूत अंतर है।

सवाल: यानी 2024 के मेनिफेस्टो में यूसीसी फिर रहेगा?

जवाब: देखिए, वो तो समय तय करेगा। इसके पहले हो सकता है देश के दो तिहाई से ज्यादा ही अपने यहां यूसीसी लगा दें। तो बाकी क्या बचा तो फिर संसद को भी सोचना पड़ेगा। नहीं हुआ तो आप चिंता मत करो, 2024 में हम ही आने वाले हैं। 2024 में हम करके दिखाएंगे।

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