महिलाओं के खिलाफ और भेदभाव वाला है हिंदू उत्तराधिकार कानून, याचिकाकर्ता की आपत्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मांगा केंद्र से जवाब

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उस याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है जिसमें कहा गया है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) की धारा-15 महिलाओं के खिलाफ है और यह भेदभाव वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि एक्ट की धारा-15 भेदभाव वाली है और यह महिलाओं के साथ भेदभाव करती है। याचिका में कहा गया है कि धारा-15 कहती है कि अगर महिला की मौत हो जाती है और उसने कोई विल नहीं की है तो उसके पैरेंट्स को उसे मिलने वाली संपत्ति के उत्तराधिकारी महिला के पति के वारिस हो जाते हैं। लेकिन अगर महिला के पैरेंट्स की मौत होती है तो उसकी संपत्ति का उत्तराधिकार या वारिस उसके खून के रिश्ते में जो वारिस हैं वही होगा। याचिकाकर्ता ने कहा कि धारा-15 मनमाना और भेदभाव वाला है और महिलाओं के साथ भेदभाव करता है।

याचिका में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धाराएं असंवैधानिक और लैंगिक समानता का उल्लंघन करने वाला बताया गया है। याचिका में कहा गया कि कोर्ट को हिंदू महिलाओं की ओर से हस्तक्षेप करना चाहिए क्योंकि जहां समाज लैंगिक समानता की ओर बढ़ रहा है, वहां हिंदू उत्तराधिकार कानून लिंग के आधार पर भेदभाव करता है। आपको बता दें कि इस मामले की सुनवाई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बेला त्रिवेदी की बेंच कर रही है।

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