Chunav Results 2022: UP से लेकर बिहार तक दिखेगा नतीजों का असर, इन 5 पॉइंट से समझिए…

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1. विकास के मॉडल पर छिड़ेगी चर्चा
इस चुनाव में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ अपने पांच सालों के गर्वनेंस के आधार पर चुनावी मैदान में थे, उन्हें सफलता मिली। अरविंद केजरीवल पंजाब में दिल्ली मॉडल के साथ मैदान में चुनौती देने उतरे, उन्हें भी सफलता मिली। अब इसके बाद दोनों के गवर्नेंस मॉडल के बीच गहन चर्चा शुरू होगी। इसका असर राष्ट्रीय राजनीति में दिख सकता है। अरविंद केजरीवाल अपने मॉडल और राजनीति से राष्ट्रीय स्तर पर उभरने की कोशिश में हैं तो बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश सबसे अहम राज्य है और योगी आदित्यनाथ अगली पीढ़ी के सबसे अहम नेता।

​2. ब्रैंड मोदी और मजबूत होकर उभरा

पांच राज्यों के चुनाव के जनादेश से ब्रैंड मोदी एक बार फिर मजबूत होगा। कोरोना महामारी और बढ़ती महंगाई के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी इस चुनाव में बड़ी चुनौती थी। उस पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत झोंकने के बाद कुछ सवाल जरूर उठे थे, लेकिन इस चुनाव के परिणाम ने 2024 की लड़ाई से पहले मोदी फैक्टर को फिर बड़े पैमाने पर स्थापित किया। इसकी बदलौत बीजेपी अगले कुछ सालों तक और चुनावी नैया को पार कराने की उम्मीद कर सकेगी।

​3. मायावती का पतन, दलित नेतृत्व की तलाश

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बदले हालात के बावजूद मायावती अपनी पुरानी परंपरागत राजनीति के बदौलत इस बार भी मैदान में थीं। सिर्फ मुस्लिम और दलित वोट की बदौलत सत्ता पाने उतरीं मायावती बाकी वोट तो दूर दोनों से अपने बेस वोट को गंवाने लगीं। 2012, 2014, 2017 के बाद 2022 विधानसभा चुनाव में मिली अब तक की सबसे बड़ी हार के बाद अब मायावती के लिए यहां से अपनी पार्टी को बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। एक समय मायावती सिर्फ उत्तर प्रदेश की ही नहीं बल्कि पूरे देश में दलित नेतृत्व का सबसे मजबूत चेहरा थीं। लेकिन अब इस चेहरे के चूक जाने से दलित नेतृत्व की एक ऐसी जगह खाली हो रही है जिसे भरने की कवायद सभी राजनीतिक दलों में दिख सकती है।

​4. बिहार में नीतीश कुमार पर बढ़ेगा दबाव

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उत्तर प्रदेश में बीजेपी को मिली बड़ी जीत का असर पड़ोस के राज्य बिहार पर भी देखा जा सकता है। वहां 2020 के आखिर में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए सरकार सत्ता में आने के बाद बीजेपी-जेडीयू के रिश्ते उठा-पटक भरे रहे हैं। बीच में ऐसी भी खबरें आईं कि नीतीश कुमार विपक्ष के राष्ट्रपति के उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि, नीतीश ने इसका खंडन किया था। लेकिन अब बीजेपी बिहार में नीतीश पर दबाव बना सकती है।

​5. विपक्ष में दिख रहा बिखराव

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राष्ट्रीय राजनीति में इस जनादेश से विपक्ष के मॉडल को बहुत ज्यादा हताशा मिली है। इससे विपक्षी पार्टियों को उबरने में वक्त लग सकता है। विपक्षी एकता में आया खालीपन, खासकर राष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ सकता है। विपक्ष को अब ऐसे मुद्दों या सरकार की गलती का इंतजार करना होगा जहां से वह खुद को सियासी जमीन पर खड़ा कर सके। इसका असर फौरी तौर पर सोमवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में देखा जा सकता है।

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