Pakistan News: आज के ही दिन पाकिस्तानी सेना की सूली पर चढ़े थे इमरान के ‘गुरु’, मौत से पहले बोले जुल्फिकार अली भुट्टो- सब खत्म!

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इस्लामाबाद : यह शायद एक इत्तेफाक ही होगा कि जब पाकिस्तान एक बड़े राजनीतिक संकट से जूझ रहा है और इमरान खान पर जुल्फिकार अली भुट्टो की ‘नकल’ करने के आरोप लग रहे हैं तब 4 अप्रैल की तारीख पड़ी है। 4 अप्रैल 1979 को ही पाकिस्तान के 9वें प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को रावलपिंडी में फांसी हुई थी। भुट्टो सिर्फ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ही नहीं बल्कि मुल्क की राजनीति का एक अहम किरदार थे। सिंध में आज के दिन सार्वजनिक अवकाश होता है। कुछ दिन पहले जब इमरान खान की पूर्व पत्नी रेहम खान ने कहा कि ‘धमकी भरे खत’ लहराकर खान जुल्फिकार अली भुट्टो बनने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं तो एक बार फिर भुट्टो पाकिस्तान की सियासत में चर्चा में आ गए।

भुट्टो का कार्यकाल 14 अगस्त 1973 से 5 जुलाई 1977 तक था। पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक ने तख्तापलट कर उनसे सत्ता छीन ली थी। कुछ ही महीनों या कहें कुछ हफ्तों बाद 3 सितंबर को भुट्टो गिरफ्तार कर लिए गए। उन पर तीन साल पहले विपक्षी नेता नवाब मोहम्मद अहमद खान की हत्या का आरोप लगाया गया। लोग तो यहां तक कहते हैं कि भुट्टो को अदालत में अपना पक्ष रखने का भी मौका नहीं मिला। लिहाजा 18 मार्च 1978 को लाहौर हाईकोर्ट ने उन्हें खान की हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुना दी।
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भुट्टो बोले- ठीक है… सब खत्म!
3 अप्रैल को शाम 6:05 बजे भुट्टो को पता चला कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी फांसी के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया है। भुट्टो ने कहा कि चूंकि उन्हें फांसी से संबंधित कोई लिखित सूचना नहीं दिखाई गई है इसलिए वह अपने वकील से मिलना चाहते हैं। ‘भुट्टो के आखिरी 323 दिन’ किताब में कर्नल रफीउद्दीन, जो तब रावलपिंडी सेंट्रल जेल में खुफिया अधिकारी थे, ने लिखा कि अधिकारी भुट्टो को फांसी की खबर देकर जाने लगे। उन्होंने रफी से पूछा कि क्या ड्रामा रचा जा रहा है? पहली बार तो रफी चुप रहे लेकिन दूसरी बार में उन्होंने बताया कि उन्हें आज ही फांसी दी जाएगी। हैरान भुट्टो के मुंह से निकला, ‘ठीक है, सब खत्म…ठीक है सब खत्म’।

आधे घंटे तक सूली पर झूलते रहे भुट्टो
फांसी से पहले भुट्टो के हाथ पीछे जबरन बांधे गए। उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाकर कुछ दूर तक ले जाया गया। भुट्टो के गले में फांसी का फंदा पहनाया गया और रात 2:04 बजे जल्लाद ने आदेश के बाद लिवर दबा दिया। आधे घंटे तक पाकिस्तान की तत्कालीन राजनीतिक का सबसे बड़ा चेहरा झूलता रहा और फिर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौजूदा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान जिस राजनीतिक संकट से जूझ रहे हैं, कुछ खबरों में उनकी तुलना भुट्टो से की जा रही है। उनके दांव-पेंच, डायलॉग, रणनीति, हालात सब भुट्टो की याद दिलाते हैं।

इमरान के दांव-पेंच और हालात भुट्टो जैसे
भुट्टो ने दावा किया था कि अमेरिका उन्हें सत्ता से बेदखल करना चाहता है। उन्होंने अमेरिकी राजनयिकों के बीच हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा था कि वे कह रहे हैं- ‘Party is over, He is gone. Opposition Parties will win over.’ कुछ ऐसा ही दावा इमरान खान भी कर रहे हैं। शुरुआत में दबे-दबे शब्दों के बाद अब वह खुलकर अमेरिका पर निशाना साध रहे हैं। भुट्टो कहते थे कि विपक्ष उनके खिलाफ एकजुट है और 9 पार्टियों ने मिलकर उनकी सरकार गिराने के लिए गठबंधन किया है। खान के खिलाफ भी पाकिस्तान के विपक्षी दल एक ही मंच पर खड़े दिखाई दे रहे हैं।

‘भुट्टो बनने की नाकाम कोशिश कर रहे इमरान’
भुट्टो ने 15 दिसंबर 1971 को यूएन में दिए एक भाषण में भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला था। अपने भाषण में उन्होंने कहा था, ‘मैं कोई चूहा नहीं हूं’। हालिया भाषणों में इमरान खान भी विपक्ष के लिए ‘चूहा’ शब्द इस्तेमाल करते नजर आए हैं। भुट्टो को सत्ता से बेदखल करने के पीछे पाकिस्तानी सेना थी और मौजूदा हालात में इमरान खान और सेना के बीच की दरार भी जगजाहिर है। इस्लामाबाद की रैली में इमरान खान ने भुट्टो की तारीफ भी की थी। लेकिन इमरान पर सबसे बड़ा तंज किसी विपक्षी पार्टी नहीं बल्कि उनकी पूर्व पत्नी रेहम खान ने कसा। भारतीय न्यूज चैनल से बात करते हुए रेहम ने कहा कि इमरान खान जुल्फिकार अली भुट्टो बनने की ‘नाकाम’ कोशिश कर रहे हैं।

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