Pakistan Next Army Chief : इमरान खान के यार हैं पाकिस्तानी राष्‍ट्रपति, आर्मी चीफ के सेलेक्शन में आ सकता है नया ट्विस्‍ट

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इस्‍लामाबाद: पाकिस्‍तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा 29 नवंबर को यानी ठीक पांच दिन बाद रिटायर हो जाएंगे। उनकी जगह देश का अगला सेना प्रमुख कौन होगा, इस बात पर आज फैसला लिया जा सकता है। छह टॉप मोस्‍ट जनरल के नाम वाली एक लिस्‍ट सरकार को भेजी गई है। ऐसी संभावना है कि इनमें से ही किसी एक को यह जिम्‍मेदारी मिल सकती है। वहीं पाकिस्‍तान के मामलों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों की मानें तो नए नाम का ऐलान काफी ट्विस्‍ट्स और टर्न्‍स से भरा हो सकता है। इस टिवस्‍ट की सबसे बड़ी वजह पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति डॉक्‍टर आरिफ अल्‍वी हो सकते हैं। इस बात को लेकर हर कोई चिंतित है कि कहीं राष्‍ट्रपति नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई रोड़ा न अटका दें या फिर इसे जटिल न बना दें। दरअसल राष्‍ट्रपति अल्‍वी, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी, पाकिस्‍तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के करीबी हैं। इसलिए ज्‍यादातर लोग मान रहे हैं कि वह नियुक्ति की प्रक्रिया में खलल डाल सकते हैं।

कौन बनेगा आर्मी चीफ
पाकिस्‍तान में इस समय यही चर्चा की सेना प्रमुख के पद की जिम्‍मेदारी अब कौन संभालेगा। पाकिस्‍तान के अखबार डॉन ने वकील उस्‍मा खावर गुहम्‍मान के हवाले से लिखा है कि अगर सेना प्रमुख की नियुक्ति जटिल होती है तो फिर इसके लिए सरकार ही दोषी होगी। उनका मानना है कि पाकिस्‍तान की सरकार को बहुत पहले ही नए सेना प्रमुख की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए थी। राष्‍ट्रपति के पास इस प्रक्रिया को बिगाड़ने के सारे विकल्‍प हैं और अगर नियुक्ति प्रक्रिया पहले शुरू हो गई होती तो शायद आज स्थिति कुछ और होती। उनका मानना है कि कानून के तहत सेना प्रमुख की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री को रावलपिंडी स्थित हेडक्‍वार्ट्स से मिलने वाले संक्षिप्‍त विवरण की कोई जरूरत नहीं है। उनकी तरफ से प्रक्रिया की शुरुआत हो जानी चाहिए थी। पाकिस्‍तानी सेना ने नए आर्मी चीफ के लिए भेजे 6 नाम, जानें किसे मिल सकती है सबसे ताकतवर कुर्सी
सरकार की लापरवाही?
उनका कहना है कि सेना प्रमुख की नियुक्ति में देरी सिर्फ सरकार की लापरवाही और उसकी अक्षमता को दर्शाती है। हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ‍ अहमद बिलाल महबूब, उस्‍मा खावर की बात से कोई सरोकार नहीं रखते हैं। महबूब, पाकिस्‍तान इंस्‍टीट्यूट ऑफ लेजिस्‍लेटिव डेवलपमेंट एंड ट्रांसपेरेंसी के मुखिया हैं और खावर की बात से असहमत हैं। उन्‍होंने बताया कि रिटायर होने वाले सेना प्रमुख आमतौर पर ये नहीं चाहते हैं कि उनके उत्‍तराधिकारी के नाम का ऐलान जल्‍दी हो। वह ऑफिस में अपने अंतिम दिन तक अपनी शक्तियों का प्रयोग करने के ख्‍वाहिशमंद रहते हैं। उनकी मानें तो उत्‍तराधिकारी की जल्‍द सूचना के चलते उनकी ताकत सेना पर कम होने की आशंका रहती है।
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इमरान के करीबी राष्‍ट्रपति
पीटीआई के मुखिया इमरान खान यह नहीं चाहते थे कि नए सेना प्रमुख के नाम का ऐलान वर्तमान गठबंधन सरकार पाकिस्‍तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) की तरफ से किया जाए। अब जबकि राष्‍ट्रपति उनके करीबी हैं, तो आशंका लगाई जा रही है कि नए सेना प्रमुख की नियुक्ति खतरे में भी पड़ सकती है। लेकिन क्‍या वाकई पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति के पास इतनी शक्ति है कि वह सेना प्रमुख की नियुक्ति को रोक सकें या फिर इसमें कोई रुकावट पैदा कर सकें? पाकिस्‍तान में भी राष्‍ट्रपति ही सरकार का मुखिया होता है।

राष्‍ट्रपति बनेंगे रुकावट!
संविधान के तहत नए सेना प्रमुख से जुड़ा विवरण प्रधानमंत्री की तरफ से 15 दिन पहले राष्‍ट्रपति के पास भेजा जाता है। वह अपने पास मौजूद शक्ति का प्रयोग करते हुए इसे पुर्नविचार के लिए सरकार के पास वापस भेज सकते हैं। प्रधानमंत्री बिना किसी तब्‍दीली के उसी फाइल को फिर से राष्‍ट्रपति के पास भेज सकते हैं। दोबारा भेजे जाने पर अगर राष्‍ट्रपति इस पर साइन नहीं भी करते हैं तो उसे स्वीकृत माना जाता है। हालांकि राष्‍ट्रपति अगर चाहें तो अगले 10 दिनों तक इस मामले पर कोई फैसला न लेकर इसे अटका सकते हैं। पाकिस्‍तान के वकील इनामुह रहमान का कहना है कि अगर राष्‍ट्रपति विवरण को अटकाते हैं और वर्तमान सेना प्रमुख का कार्यकाल खत्‍म हो जाता है तो फिर सबसे सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल को सेना प्रमुख की जिम्‍मेदारी सौंपी जा सकती है।

क्‍या कहता है कि संविधान
पाकिस्‍तान में हमेशा से यह बड़ा सवाल रहा है कि आखिर सेना प्रमुख की नियुक्ति पर अंतिम फैसला किसका होता है? हमेशा से इस बात पर बहस होती आई है कि राष्‍ट्रपति को सेना प्रमुख की नियुक्ति अपनी बुद्धिमता से करनी चाहिए या फिर उन्‍हें प्रधानमंत्री के साथ इस पर सलाह मशविरा करके कोई फैसला लेना चाहिए? वहीं संविधान के अनुच्‍छेद 48 (1) के तहत वह प्रधानमंत्री को नियुक्ति को लेकर सलाह भी दे सकते हैं।

पांच बार संशोधन
पाकिस्‍तान के संविधान के 1973 के अनुच्‍छेद 243 को कम से कम पांच बार संशोधित किया गया है। हर बार इस बात को लेकर संघर्ष होता रहा कि किसे इस अहम नियुक्ति की जिम्‍मेदारी मिलनी चाहिए। इस अनुच्‍छेद के तहत प्रधानमंत्री को यह ताकत दी गई है कि वह सेना प्रमुख की नियुक्ति करें। वहीं अनुच्‍छेद 48 (1) के मुताबिक राष्‍ट्रपति को प्रधानमंत्री के साथ सलाह-मशविरा करके कोई फैसला करना चाहिए।

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