UNHRC से सस्पेंड हुआ रूस, भारत ने मॉस्को के खिलाफ UNGA में लाए प्रस्ताव पर फिर नहीं की वोटिंग

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न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से रूस को बाहर करने के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में आपातकालीन मतदान किया गया। पिछले नौ बार की तरह भारत ने इस बार भी मतदान से दूरी बनाकर रखी। रूस को बाहर करने के पक्ष में 93 देशों ने मतदान किया, जबकि विपक्ष में सिर्फ 24 वोट पड़े। इस दौरान चीन ने खुलकर रूस का साथ देते हुए प्रस्ताव के खिलाफ वोटिंग की। वहीं, भारत, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, समेत 58 देश अनुपस्थित रहे। 47 सदस्यों वाले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से रूस को बाहर करने को लेकर अमेरिका ने प्रस्ताव पेश किया था। मतदान के बाद रूस का मानवाधिकार परिषद से बाहर कर दिया गया है

मतदान को लेकर मुश्किल में फंसा था भारत
रूस के खिलाफ इस प्रस्ताव पर वोटिंग को लेकर भारत के सामने बड़ी दुविधा थी। रूस और अमेरिका दोनों देशों के साथ भारत के संबंध काफी अच्छे हैं। ऐसे में नई दिल्ली के सामने किसी एक पक्ष को चुनने को लेकर भारी दुविधा थी। इस बीच संयुक्त राष्ट्र में रूस के प्रतिनिधि ने एक बयान जारी कर भारत की परेशानी को और बढ़ा दिया था। रूसी मिशन ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को चेतावनी देते हुए कहा था कि वोटिंग में भाग नहीं लेना भी रूस का विरोध करना ही माना जाएगा जिसे रूस कम-से-कम दोस्ताना व्यवहार तो नहीं मानेगा।

भारत ने नौ बार रूस के खिलाफ नहीं किया मतदान
भारत इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ नौ बार मतदान से दूर रहा है। इनमें से दो बार मतदान आज की ही तरह संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुआ था। भारत ने अभी तक रूस के खिलाफ किसी भी प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से आखिरी बार 2011 में लीबिया को निकाला गया था। उस वक्त लीबिया के खिलाफ प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया था।

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पीएम मोदी से सुरक्षा गारंटर बनने की मांग कर रहे जेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोडोडिमिर जेलेंस्की भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यूक्रेन का सुरक्षा गारंटर बनने की मांग कर रहे हैं। एक इंटरव्यू के दौरान जेलेंस्की ने कहा कि वे चाहते हैं कि पीएम मोदी यूक्रेन की सुरक्षा के गारंटर बनें। ऐसे में रूस अगर समझौते का उल्लंघन करता है तो गारंटर भी उनके खिलाफ खड़े होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को रूस और यूक्रेन के साथ संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना मुश्किल है।

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